10.75 लाख की गार्डनिंग, मौके पर दिखे कुछ पौधे; विभाग बोला- कलेक्ट्रेट, रेस्ट हाउस और सिविल लाइन के भवनों में हुआ काम,
पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस समेत सरकारी भवनों में गार्डनिंग के नाम पर 9 लाख से ज्यादा भुगतान,

10.75 लाख की गार्डनिंग, मौके पर दिखे कुछ पौधे; विभाग बोला- कलेक्ट्रेट, रेस्ट हाउस और सिविल लाइन के भवनों में हुआ काम,
रेस्ट हाउस की गार्डनिंग चार-पांच साल से एक ही जैसा कुछ परिवर्तन नजर ही नहीं आया ,
कलेक्ट्रेट में भवन के बीच में हुआ दिखावटी गार्डनिंग का काम,
पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस समेत सरकारी भवनों में गार्डनिंग के नाम पर 9 लाख से ज्यादा भुगतान,
कर्मचारियों और नगरवासियों के बयानों से उठे सवाल,
खैरागढ़। जिले के लोक निर्माण विभाग खैरागढ़ के रेस्ट हाउस और विभिन्न शासकीय भवनों में गार्डनिंग के नाम पर लाखों रुपए का भुगतान किया गया है, लेकिन मौके पर काम को लेकर तस्वीर उतनी स्पष्ट नजर नहीं आती। विभागीय दस्तावेज के अनुसार एमएस शांति नर्सरी एंड फर्टिलाइजर को यह काम 10.75 लाख रुपए की अनुबंधित राशि पर दिया गया था। कार्यादेश 25 सितंबर 2025 को जारी हुआ और 9 दिसंबर 2025 तक काम पूरा किया जाना था। इसके बाद 19 दिसंबर 2025 को अंतिम भुगतान में 9,99,393 रुपए का कार्य मूल्य दर्ज किया गया और कटौतियों के बाद 9,00,461 रुपए का भुगतान किया गया।
रेस्ट हाउस में वर्षों से देख रहे लोग बोले- कुछ पौधे बदले, बड़ा काम नहीं दिखा
मौके की स्थिति को लेकर नगरवासी सहित अन्य लोगों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से रेस्ट हाउस परिसर को देखते आ रहे हैं। परिसर में कुछ पौधे लगाए या बदले गए हैं, लेकिन करीब 10 लाख रुपए के गार्डनिंग कार्य के अनुरूप बड़े स्तर पर कोई बदलाव नजर नहीं आया। लोगों के अनुसार न तो गार्डन का स्वरूप खास बदला दिखता है और न ही ऐसा व्यापक काम दिखाई देता है, जिससे इतने बड़े भुगतान का अंदाजा लगाया जा सके।
महिला कर्मचारी ने काम बताने से किया इनकार, बोलीं- साहब पूछ लीजिए
मौके पर मौजूद एक महिला कर्मचारी से जब गार्डनिंग कार्य के संबंध में जानकारी लेने की कोशिश की गई तो उन्होंने इस बारे में कुछ भी बताने से साफ तौर पर मना कर दिया। महिला कर्मचारी ने कहा कि “आप साहब से पूछ लीजिए।” वहीं मौके पर मौजूद अन्य चतुर्थ वर्ग कर्मचारी की ओर से इतना जरूर बताया गया कि कुछ पौधे लगाए गए हैं। लेकिन गार्डनिंग के तहत कितने पौधे लगाए गए, कितनी क्यारियां तैयार की गईं, लैंडस्केपिंग या अन्य कौन-कौन से काम हुए, इसकी स्पष्ट जानकारी मौके पर नहीं मिल सकी। ऐसे में विभागीय दस्तावेज में दर्ज करीब 10 लाख रुपए के कार्य और जमीन पर दिखाई देने वाले काम के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कागज में करीब 10 लाख का काम, रेस्ट हाउस से सरकारी भवनों तक उठे सवाल
सीएम पोर्टल पर शिकायत के बाद कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से रेस्ट हाउस, कलेक्टर कार्यालय और सिविल लाइन क्षेत्र के शासकीय भवनों में गार्डनिंग कार्य के लिए भुगतान किए जाने की जानकारी दी गई थी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सवाल भुगतान होने का नहीं, बल्कि भुगतान के बदले वास्तव में कितना और कैसा काम हुआ, इसका है। दस्तावेज में कार्य मूल्य 9,99,393 रुपए दर्ज है, जबकि मौके पर लोगों को कुछ पौधों के अलावा बड़े स्तर का गार्डनिंग कार्य दिखाई नहीं देने की बात कही जा रही है। यही वजह है कि अब इस पूरे मामले में विभागीय रिकॉर्ड और मौके की स्थिति के बीच उठे सवाल चर्चा में हैं।






