स्कूलों मे मरम्मत और अतिरिक्त कक्ष का तीन साल बाद भी नही करा सके निर्माण,
स्कूलों मे मरम्मत और अतिरिक्त कक्ष का तीन साल बाद भी नही करा सके निर्माण

स्कूलों मे मरम्मत और अतिरिक्त कक्ष का तीन साल बाद भी नही करा सके निर्माण
जिले से 25 स्कूलो मे निर्माण की राशि शासन ने वापस ली, अब प्रस्ताव भेज कर मांगी स्वीकृति
प्रदीप बोरकर खैरागढ़ । जिले के जर्जर और कमरो की कमी को लेकर मुख्यमंत्री जतन योजना के तहत आई राशि का तीन साल बाद भी उपयोग और निर्माण कार्य नही होने के चलते 25 स्कूलो मे मरम्मत और अतिरिक्त कक्ष निर्माण की राशि शासन ने वापस ले ली। तीन साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अनुशंसा पर मुख्यमंत्री जतन योजना के तहत जिले के ढाई सौ से अधिक स्कूलो की मरम्मत और अतिरिक्त कक्ष के लिए जिले को 7 करोड़ रू से अधिक की राशि मिली थी। इसमे अतिरिक्त कक्ष के लिए जिले के 131 प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूल तथा 169 प्राथमिक और पूर्व माशा मे मरम्मत कार्य कराया जाना था। इसमे शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक स्कूल शामिल थे। मरम्मत कार्य के लिए 3 करोड़ 69 लाख और अतिरिक्त कक्ष के लिए लगभग पौने चार करोड़ रू की राशि स्वीकृति करते कार्य को छह माह से पहले ही पूर्ण करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते तीन साल बाद भी कई स्कूलो के कार्य पूर्ण नही किए गए है। अभी भी दर्जन भर से अधिक स्कूलो का निर्माण कार्य बाकी है। इसमे 25 ऐसे स्कूल भी शामिल है जहाँ निर्माण और मरम्मत कार्य अब तक शुरू नही करने, योजना बंद होने के चलते शासन ने उसकी राशि वापस मांग ली ।
इन स्कूलो के अटक गए काम
जिले मे जतन योजना की राशि आने के बाद भी कार्य शुरू नही होने के चलते प्राथमिक शाला कटंगी कला, बिरनपूर, धनेली, पिपरिया, सिंगारपूर, प्राशा क्रं एक, टिकरापारा, खैमतराई, पेन्ड्रीकला, आमगांव, जंगलपूर, नचनियाटोला, पेन्ड्रीखुर्द, नवीन पिपरिया, कटेमा, लिमऊटोला, मलैदा शामिल है। जबकि पूर्व माशा धोधा, पिपरिया, बालक खैरागढ़, जंगलपूर, टोलागांव हायरसेंकेंडरी कन्या शाला खैसगढ़ पूर्व माशा कटंगीखुर्द और नया करेला मे भी मरम्मत और अतिरिक्त कक्ष के निर्माण कार्य नही कराए जा सके । इन 25 कार्यों मे 18 कार्य मरम्मत और 8 कार्य अतिरिक्त कक्ष निर्माण के थे। इनमे से अधिकांश स्कूल वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रो मे है जहाँ छात्रो के पर्याप्त बैठने की व्यवस्था नही है तो छत से पानी टपकने, दीवारो में दरारे फ्लोरिंग उखड़ने, जर्जर भवन की शिकायते सबसे ज्यादा है ।
निर्माण एजेंसी समय पर नही करा सकी काम
विभागीय दावो के मुताबिक तत्कालीन स्वीकृति के बाद मरम्मत और अतिरिक्त कक्ष निर्माण कार्य ग्रामीण क्षेत्रो मे पंचायतों और शहरी क्षेत्र मे नगरीय निकायो को दिए गए थे। कही जमीन की दिक्कत तो कही अन्य अव्यवस्था के चलते निर्माण कार्य लंबे समय से अटका रहा । योजना की राशि जारी होने के बाद योजना पूरी तरह बंद कर दी गई। इसके चलते इसमे बदलाव और आगे बढ़ाने जैसी स्थिति नही बन पाई । कही कम पड़ी राशि भी विभागीय और शासन स्तर पर स्वीकृत कराने की स्थिति नही रही । शिक्षा विभाग के अधिकारियो का दावा है कि कई बार निर्माण कार्य शुरू कराने संबंधित एजेसियो को नोटिस भी जारी किए गए लेकिन कार्य शुरू ही नही हो पाया। इसके चलते राशि वापस हो गई ।
वीवीरामजी मे कर चुके प्रस्ताव
शिक्षा विभाग अधूरे और नही हो पाए निर्माण और मरम्मत कार्यों को अब नई योजना वीबी रामजी के तहत कराने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज चुकी है। विभागीय अधिकारियो ने बताया कि मरम्मत और अतिरिक्त कक्ष निर्माण के प्रस्ताव नए सिरे से तैयार किए गए है इसमे नही जुड़ पाए ऐसे स्कूलो को भी शामिल किया गया है जहाँ मरम्मत और निर्माण की सख्त जरूरत है । स्वीकृति मिली तो नए सिरे से कार्य कराए जा सकेगें ।
स्कूलो मे मरम्मत, भवन विहीन, निर्माण सहित अन्य कार्यों की स्वीकृति का प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलते ही ऐसे कार्य प्राथमिकता के साथ पूरे कराए जाएगें ।
उपेन्द्र कुमार देवागन जिला शिक्षा अधिकारी खैरागढ़





