जयपुर से संविधान की पुस्तक लेकर लौटी खैरागढ़ की विप्रांशी,
भारतीय युवा संसद में किया छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व,

जयपुर से संविधान की पुस्तक लेकर लौटी खैरागढ़ की विप्रांशी,
भारतीय युवा संसद में किया छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व,
प्रदीप बोरकर खैरागढ़। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित भारतीय युवा संसद के अधिवेशन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर खैरागढ़ की छात्रा विप्रांशी पाठक वापस लौटी हैं। जयपुर में आयोजित इस अधिवेशन में देशभर से पहुंचे युवाओं ने विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया। आयोजन में सहभागिता के बाद विप्रांशी भारतीय संविधान की प्रति लेकर खैरागढ़ लौटीं।
विप्रांशी खैरागढ़ रियासत के राजपुरोहित स्व. श्रीलाल पाठक की पोती और वरिष्ठ पत्रकार अविनाश पाठक की भतीजी हैं। उनके पिता संगीतकार एवं शिक्षक डॉ. विभाष पाठक और माता प्राची पाठक, दोनों शिक्षकद्वय हैं। शिक्षा, संगीत, पत्रकारिता और संस्कृति से जुड़े परिवार की पृष्ठभूमि में पली-बढ़ी विप्रांशी ने राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया।
विप्रांशी कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय की छात्रा हैं। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों के दल ने भारतीय युवा संसद के राष्ट्रीय अधिवेशन में भाग लिया। अधिवेशन के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न संवाद एवं विचार-विमर्श सत्रों में सहभागिता की। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों ने कर्मा नृत्य की प्रस्तुति भी दी।
आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को भारतीय संविधान की प्रति प्रदान की गई। आयोजकों के अनुसार युवाओं को संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों, अधिकारों और नागरिक कर्तव्यों से परिचित कराने के उद्देश्य से संविधान की पुस्तक प्रदान की गई। विप्रांशी के लिए यह सहभागिता विशेष रही, क्योंकि राष्ट्रीय मंच पर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने के साथ उन्हें संविधान की प्रति भी प्राप्त हुई।
भारतीय युवा संसद के इस राष्ट्रीय आयोजन में विभिन्न राज्यों के राज्यपालों सहित जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में युवाओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों को समझने का अवसर मिला।
अधिवेशन में शामिल छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों ने राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मांग की है कि भारतीय युवा संसद जैसे राष्ट्रीय स्तर के आयोजन छत्तीसगढ़ में भी आयोजित किए जाएं। विद्यार्थियों का कहना है कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से देशभर के युवाओं को छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने का अवसर मिलेगा।





