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उप जेल सलोनी मे विधिक जागरूकता शिविर का हुआ आयोजन 

जेल में बंद विचाराधीन बंदियों को दी गई विधिक जानकारी 

Khabar Khairagariya

 

 उप जेल सलोनी मे विधिक जागरूकता शिविर का हुआ आयोजन 

 जेल में बंद विचाराधीन बंदियों को दी गई विधिक जानकारी 

 

शैलेन्द्र मिश्रा/खैरागढ़:-राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली व अध्यक्ष सुषमा सावंत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजनांदगांव के निर्देशानुसार सचिव हेमंत कुमार रात्रे और तालुक विधिक सेवा समिति खैरागढ़ द्वारा आज दिनांक 05-05-2024 को विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन उप जेल खैरागढ़ में किया गया जहां अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चन्द्र कुमार कश्यप द्वारा उप जेल में रह रहे विचाराधीन बंदियों को संबोधित करते हुए प्ली बारगेनिंग के संबंध में बताया गया कि

किसी व्यक्ति द्वारा किया गया ऐसा अपराध जिसकी सजा 7 साल या उससे कम है या अभियुक्त ने पहली बार अपराध किया है वह अपनी सजा कम करने के लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन कर सजा में सौदेबाजी कर सकता है. छोटे अपराधों में पीड़ित और अभियुक्त आपसी सामंजस्य से सौदेबाजी कर सकते हैं.

अगर कोई आरोपी अपनी गलती स्वीकार करता है तो उसे कम सजा दी जाती है. लेकिन प्ली बारगेनिंग का लाभ किसी भी विचाराधीन आरोपी को एक बार ही मिल सकता है।

आगे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विवेक गर्ग ने निशुल्क एवं सक्षम विधिक सहायता के संबंध में बताया कि यह कानून निःशुल्क विधिक सहायता को मूर्तरूप देता है। यह कानून वैसे व्यक्ति जो निर्धनता या जाति, पंथ या लिंग संबंधी संवेदनशीलता के कारण कोई मामला दर्ज करने या मामले का बचाव करने के लिए एक वकील की सेवा लेने में समर्थ नहीं हैं, को कानूनी सहायता प्रदान करता है ताकि न्यायालय में उन्हें भी वकील की सेवा मिल सके।

जो विचाराधीन बंदी अपने वेयर से अधिवक्ता नियुक्त करने में समर्थ नहीं हैं वह अपना एक आवेदन ताल्लुक विधिक सेवा समिति में द्वारा द्वारा जेल अधीक्षक के माध्यम से समिति में अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं जहां से आप को आप के केस में पैरवी करने हेतु अधिवक्ता निशुल्क नियुक्त किया जाता है

आगे जुडिशल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास गुरु प्रसाद देवांगन ने विचाराधीन बंदियों के अधिकारों के बारे में बताया गया कि कानून के मुताबिक किसी भी शख्स को तब तक गुनाहगार नहीं माना जा सकता जब तक कि कोर्ट आरोपी को दोषी नहीं मानता। जब भी किसी शख्स के खिलाफ कोई आरोप लगाया जाता है तो वह आरोपी होता है और जब उक्त शख्स का केस अदालत के सामने आता है तब उसका यह संवैधानिक अधिकार है कि उसे अपने बचाव का मौका मिले।

आगे पैरालीगल वालंटियर गोलूदास साहू द्वारा 13.07.2024 को आयोजित होने वाले नेशनल लोक अदालत के बारे में बताया गया, आगे एडीजे श्री कश्यप द्वारा विचाराधीन बंदियों का हालचाल पूछा गया और उनके स्वास्थ्य के बारे में भी जाना गया साथ ही उनकी समस्याओं को भी सुना गया और पाक शाला का भी निरीक्षण किया और विचाराधीन बंदियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए योग और मेडिटेशन कराने हेतु निर्देशित किया गया।

उक्त शिविर में जेल अधीक्षक योगेश कुमार बंजारे, पीएलवी गोलूदास साहू, एवं सिपाही प्रेम सागर साहू, यशवंत नायक, सुभाष बोई ,यशवंत झरिया, प्रमोद कौशिक और विचाराधीनबंदी उपस्थित थे|


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