मदनवाड़ा हमले में शहीद शहर के निकेश यादव के माता पिता ने कहा
मां ने कहा सरेंडर करने वालो की सुरक्षा और रोजगार का पर्याप्त इंतजाम हो तो ही मुक्ति

मदनवाड़ा हमले में शहीद शहर के निकेश यादव के माता पिता ने कहा
नक्सलवाद से कई घर परिवार और गांव को नुकसान हुआ, विकास और शिक्षा को प्रभावित इलाके मे मिले प्राथमिकता
मां ने कहा सरेंडर करने वालो की सुरक्षा और रोजगार का पर्याप्त इंतजाम हो तो ही मुक्ति
खैरागढ़ । प्रदेश मे नक्सलियों के पुनर्वास नीति और आत्मसमर्पण के बाद नक्सल मूक्त हो चुके इलाको में विकास कार्यों को प्राथमिकता से पूरा कराए जाने पर ही क्षेत्र विकसित हो सकेगा। 12 जुलाई 2009 मे मदनवाड़ा नक्सली हमले मे तत्कालीन एसपी विनोद चौबे के साथ शहीद हुए खैरागढ़ शहर के प्रथम शहीद निकेश यादव के मातापिता यही चाहते है। 16 साल पहले अपने पुत्र की शहादत दे चुके शहीद निकेश के पिता पुरषोत्तम यादव और मां निर्मला उस पल को याद कर सिहर उठती है। बातचीत मे पिता यादव ने कहा कि नक्सलवाद से बहुत ज्यादा नुकसान हुआ। परिवार, घर, गांव उजड़ गए। समाज को. फर्क पड़ा। पुरूषोत्तम यादव ने कहा कि नक्सल मुक्त होने से अब किसी घर का बेटा शहीद नही होगा। शांति के साथ विकास आगे बढ़ेगा तो इसका फायदा उन इलाको को मिलेगा जहाँ नक्सली दहशत के चलते कुछ नहीं हो पाया। ऐसे इलाको में विकास कार्य, शिक्षा की पर्याप्त व्यवस्था, रोजगार, उद्योग के लिए आवश्यक प्रयास जरूरी बताते यादव ने कहा बेटे की शहादत के बाद राजनांदगांव पुलिस से पूरा सम्मान मिलता रहा है। परिवार को पर्याप्त व्यवस्था और सुविधा मिली। लगातार सम्मान मिल रहा लेकिन बेटे की कमी बरकरार है।
दो दिन पहले आया था घर
शहीद निकेश के शहादत को यादव करते पिता पुरूषात्तम यादव ने कहा कि घटना के दो दिन पहले ही निकेश घर आया था। पिता के साथ रहा । छोटे भाई ओकेश को पिता का ध्यान रखने कह ड्यूटी पर लौटा था दो दिन बाद ही उसकी शहादत हो गई । पिता यादव बताते है कि घटना की जानकारी उन्हें और पत्नी को न मिले इसके चलते परिजनो ने घर के टीवी केवल कनेक् शन काट दिए। आनन फानन मे उन्हे अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहाँ भी जानकारी नहीं दी। दूसरे दिन घर के सामने लगी भीड़ ने उन्हे अनहोनी की आशंका में डूबो दिया । महज दो साल की पुलिस सेवा मे रहे शहीद निकेश के बड़े सपने पूरे होते होते रह गए।
सरेंडर वालो को मिले सुरक्षा और रोजगार
शहीद निकेश यादव की माता निर्मला यादव ने बातचीत में कहा कि बेटा तो वापस नही आ सकता लेकिन नक्सलमुक्ति के बाद सरेंडर कने वाले नक्सलियो को सरकार से बेहतर सुरक्षा और पर्याप्त अवसर मिलेगा तो वे वापस मुड़कर नही देखेंगें। माता निर्मला ने बताया कि बेटे की शहादत के बाद पुलिस प्रशासन से मानसम्मान में कोई कमी नहीं आई है लेकिन बेटे के घर लौटने का रास्ता आज भी परिजन देखते है। उसकी कमी पूरी नहीं हो पाई है।
