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जिले की 43 धान खरीदी केन्द्रों मे 37 हजार क्विंटल धान का शार्टेज, 8 समितियो मे ही सौ फीसदी हो सका उठाव

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प्रशासनिक कार्यवाही की बजाय अब मामले को दबाने में जुटे अधिकारी

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खैरागढ़ । जिले मे समाप्त हुई धान खरीदी के बाद जिले की समितियों में भी 37 हजार क्विंटल धान का शार्टेज निकला है । समितियो से धान के उठावं के बाद जिले की 51 खरीदी केन्द्रों में 37897 क्विंटल धान कम पाए गए है। जिले की आठ समितियों मे ही सौ फीसदी धान का उठाव हुआ है बाकी सभी समितियों मे धान के शार्टेज पाए गए है। धान शार्टेज मामले में स्थानीय प्रशासन जहां मामले दबाने मे जुटा है तो विपणन विभाग, सहकारिता विभाग और बैंक प्रबंधन मामले को एक दूसरे पर थोपने मे जूट गए है। अन्य जिलो मे लगातार धान शार्टेज की जानकारी के बीच खैरागढ़ जिले की 43 धान खरीदी केन्द्रों मे धान का बड़ा शार्टेज सामने आया है। हालंकि समितियो द्वारा देरी से धान उठाव के चलते सूखत होने की जानकारी दी जा रही है। लेकिन मामले में अब तक जांच शुरू नही होने से कोई कार्यवाही और स्थिति की वास्तविकता सामने नहीं आ पाई है।

43 खरीदी केन्द्रों में 36897 क्विंटल धान का शार्टेज, 8 समितियो मे ही सौ फीसदी उठाव

जिले मे 39 सेवा सहकारी समितियो के 51 धान खरीदी केन्द्रों के माध्यम से इस बार भी धान की खरीदी की गई है। जिले की समितियो मे कुल 37 लाख 57 हजार 560 क्विंटल धान की खरीदी की गई है। इन समितियो मे धान के उठाव के बाद अब तक 37 हजार 897 क्विंटल धान का शार्टेज सामने आया है। सौ फीसदी उठाव के बाद बिना शार्टेज वाली समितियो मे केवल भोरमपूर कला, धोधा, मुढ़ीपार, मानिकचौरी, सिलपटटी, बरबसपूर, सुखरी और काशीटोला खरीदी केन्द्र ही शामिल है। जहां से खरीदे गए धान का पूरा उठाव हो चुका है । बाकी सभी समितियो मे शार्टेज दर्ज किया गया हे। जिस पर कार्यवाही करने से प्रशासन पीछे हटा रहा है अब तक मामले मे कोई उचित कार्यवाही के आदेश जारी नही हो पाए है।

प्रशासनिक कार्यवाही के बजाय दबाने मे जूटे अधिकारी

धान खरीदी केन्द्रों मे धान शार्टेज मामले मे जिले मे अब तक कोई कार्यवाही सामने नही आई है। मामले मे जिला प्रशासन भी मौन है तो सहकारी बैंक, सहकारिता विभाग भी मामले को दबाने मे जूटा है। मामले से जुड़ी जानकारी देने से इन विभागो के कोई भी अधिकारी कतरा रहे है । और एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे है। बताया गया कि जिले मे धान भंडारण के मामले को भी दबाने का प्रयास किया गया था । अब समितियो मे हुए शार्टेज को भी गुपचुप तरीके से दबाए जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

समितियो का दावा देरी से उठाव के चलते शार्टेज

समितियो मे धान के पूरे उठाव के बाद निकले बड़े शार्टेज पर समितियो के अलग अलग दावे है। समिति कर्मचारियो का दावा है कि शासन ने निर्धारित किए गए उठाव के समय तक धान का उठाव नही किया। मई के दूसरे सप्ताह तक जिले की समितियो से धान का उठाव हुआ है। फरवरी तक धान का उठाव किया जाना था। लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के च लते 15 मार्च के बाद डीईओ काटे गए है। जबकि समिति पदाधिकारी और कर्मचारी लगातार धान के समय पर उठाव के लिए अधिकारियो के चक्कर लगाते रहे। ऐसे मे गर्मी के चलते धान मे सूखत की समस्या सबसे ज्यादा आई है। देरी से उठाव के कारण ही बड़े शार्टेज सामने आए है। कई समिति के कर्मचारियो ने साफ कह दिया कि ऐसे में किसी भी प्रकार की कार्यवाही होगी तो वे सामना करने को तैयार है ।

सूखत के नाम पर खेल, ज्यादा लिया धान

जिले की धान खरीदी केन्द्रों मे सूखत के नाम पर जारी खेल वर्षों से जारी है। हर साल होने वाली खरीदी के दौरान किसानो से निर्धारित मात्रा छोड़कर अतिरिक्त धान लिए जाने की शिकायते भी सामने आई थी। इसके बाद भी सूखत के नाम पर 37 हजार क्विंटल धान का शार्टेज होना बड़े घपले और भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है। सूखत के नाम पर बड़े खेल की जांच नही होने और मामला स्थानीय स्तर पर ही दबने के चलते इसमें शामिल अधिकारी कर्मचारियो को कार्यवाही का डर नहीं है!

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