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आठ साल से अटकी बाईपास सड़क योजना का नही मिला शहर को लाभ

शहर मे यातायात का दबाव बढ़ा भारी वाहनो से दुर्घटनाओ का डर, अधूरे पुल और सड़क निर्माण ने बढ़ाई परेशानी

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आठ साल से अटकी बाईपास सड़क योजना का नही मिला शहर को लाभ

शहर मे यातायात का दबाव बढ़ा भारी वाहनो से दुर्घटनाओ का डर, अधूरे पुल और सड़क निर्माण ने बढ़ाई परेशानी

खबर खैरागढ़िया

खैरागढ़ । शहर के भीतर यातायात व्यवस्था सुधारने आठ साल पहले शुरू हुई बाईपास सड़क योजना विभागीय लापरवाही के चलते अब तक मूर्त रूप नही ले सकी है। राइसमिल से सोनेसरार तक छह किमी लंबी बाईपास निर्माण की स्वीकृति 2008 मे तत्कालीन मूख्यमंत्री रहे डा रमन सिंह ने दी थी। विभागीय लापरवाही के चलते दस साल इसके सर्वे मे लगा दिए गए है। इस दौरान जमकर जमीनो की खरीद फरोख्त के बाद योजना फाइलो मे दब गई। 2018 में इसके निर्माण की प्रक्रिया आखिरकार शुरू कराई गई। लेकिन सड़क और उच्च स्तरीय पुल निर्माण के अलग अलग कार्यों से बाईपास योजना फिर अटक गई । तीन साल पहले बाईपास सड़क का लोनिवि ने आनन फानन मे निर्माण करा छोड़ दिया। लेकिन तत्कालीन समय में बाईपास मार्ग में बनने वाले तीन उच्च स्तरीय पुल निर्माण की प्रक्रिया अधर में अटकी पड़ी रही। लेदेकर 2021 में शुरू हुई आमनेर नदी उच्च स्तरीय पुल का निर्माण सबसे पहले शुरू किया गया लेकिन पांच साल बीतने के बाद भी आमनेर नदी पर बनने वाले पुल का आधा निर्माण कार्य अब तक पूरा नही हो पाया है। जबकि दो साल पहले मुस्का नदी और मोतीनाला में बनने वाले पुल का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। आमनेर नदी पर बनने वाले पुल की प्रक्रिया अब तक पूरी नही होने के चलते बाईपास सड़क योजना अब तक खटाई में पड़ी है।

तीन बार टेंडर फिर भी अधूरा पड़ा पूल

आमनेर नदी पर बनने वाले उच्च स्तरीय पुल का सेतू निगम तीन बार टेंडर करा चुका है। हर बार ठेकेदार और विभाग के बीच आपसी गडबड़ी के चलते इसका कार्य निरस्त किया गया है। तीसरी बार फिर से जारी किए गए टेंडर के बाद इसका निर्माण कार्य कछुआ गति से जारी है जिससे इसक निर्माण की समयसीमा तय नही हो पा रही है। पुल निर्माण नही होने से बाईपास सड़क के कई हिस्से बिना आवाजाही शुरू हुए ही क्षतिग्रस्त होने लगे है । सोनेसरार से शुरू होने वाली बाईपास सड़क मे दो किमी दायरे में जगह जगह बड़ी दरारो से बाईपास सड़क दो टुकड़ो मे बंट रही है। इधर सड़क निर्माण के बाद बाईपास को पूरा करा शुरू कराने स्थानीय प्रशासन के साथ साथ लोनिवि भी मूकदर्शक बना हुआ है. ।

तीन बार टेंडर फिर भी अधूरा पड़ा पूल

आमनेर नदी पर बनने वाले उच्च स्तरीय पुल का सेतू निगम तीन बार टेंडर करा चुका है। हर बार ठेकेदार और विभाग के बीच आपसी गडबड़ी के चलते इसका कार्य निरस्त किया गया है। तीसरी बार फिर से जारी किए गए टेंडर के बाद इसका निर्माण कार्य कछुआ गति से जारी है जिससे इसक निर्माण की समयसीमा तय नही हो पा रही है। पुल निर्माण नही होने से बाईपास सड़क के कई हिस्से बिना आवाजाही शुरू हुए ही क्षतिग्रस्त होने लगे है । सोनेसरार से शुरू होने वाली बाईपास सड़क मे दो किमी दायरे मे जगह जगह बड़ी दरारो से बाईपास सड़क दो टुकड़ो मे बंट रही है। इधर सड़क निर्माण के बाद बाईपास को पूरा करा शुरू कराने स्थानीय प्रशासन के साथ साथ लोनिवि भी मूकदर्शक बना हुआ है. ।

करोड़ो खर्च के बाद भी लाभ नही

बाईपास सड़क का लाभ भले अब तक आम लोगो और यातायात व्यवस्था को नही मिल पाया है। लेकिन बाईपास सड़क के बहाने जमीन दलाल और कई लोग लाखो की कमाई कर बैठ गए है। बाईपास सड़क मे अपनी जमीन लाने और अधिग्रहण के बदले बड़ा मुनाफा कमाने कई बार फेरबदल करने के चलते इसकी लागत डेढ़ गुना अधिक बढ़ गया। जमीन अधिग्रहण मे भी कई बार इस्टीमेट बदलने से सीधी बाईपास सर्पाकार हो गई । लेकिन इसका निर्माण पूरा कराने शासन प्रशासन दिलचस्पी नही दिखा रहा है । मोतीनाला और मुस्का नदी मे पुल निर्माण के बाद भी वहाँ बची सड़क निर्माण को लेकर साल भर बाद भी लोनिवि अधिकारी मौके पर झांकने नही गए है । जबकि नागपूर, बालाघाट डोंगरगढ़ कवर्धा की ओर से आने वाले वाहनो को गूगल मैंप बाइपास सड़क से ही आवाजाही करने की सलाह देता है । लेकिन वाहन चालक बाईपास सड़क मे आवाजाही कर फंस जाते है ।

शहर को लाभ नही बढ़ा भारी वाहनो का दबाव

बाईपास सड़क योजना का लाभ पूरे शहर को मिलना है। शहर के पिपरिया से लेकर सिविललाइन, बस स्टैंड, पूराना स्टैण्ड, तुरकारीपारा, ईतवारीबाजार, किलापारा, अमलीपारा चौक में यातायात की बिगड़ी व्यवस्था के साथ जगह जगह भारी वाहनो से सड़क जाम होने, भारी वाहनो के समय बेसमय शहर के भीतर से बेधडक गुजरने जैसी परेशानियां आज भी बरकरार है। बाईपास सड़क परियोजना पूरी होने से शहर के भीतर भारी वाहनो की आवाजाही कम होगी तो दबाव हैटेगा लेकिन बाईपास सड़क को लेकर प्रशासनिक लापरवाही शहरवासियो पर भारी पड़ रही है ।


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